बड़ी मीठी सी वो ख़ामोशी थी
जो तेरे मेरे दरमिया थी ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
शब्दों की कोई कमी ना थी
पर होठों पे कोई बात जमी ना थी ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
चहरे पे चमक ,आखों में हया
और अधरों पर मुस्कान थी
उस लम्हे में बस गई
मेरी जान थी ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
एक कदम का भी फासला ना था ,,,,,,,,,,,,,,,,
पर ना जाने क्यों लगा की मीलों
की दूरी थी ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
उसे छूने की चाह दिल जगी
पर ना जाने क्या मजबूरी थी
सच बड़ी मीठी सी वो ख़ामोशी थी ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
उमा चौधरी
2 comments:
sundar rachna ...kafi dino baad blog post ki ...kaha thi ? intne dino anyways der aaye durust aaye.....
Jai Ho mangalmay HO
Thanx For Comment On My Blog....
Gud Luck
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