Monday, December 13, 2010

ख़ामोशी

बड़ी मीठी सी वो ख़ामोशी थी
जो तेरे मेरे दरमिया थी ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
शब्दों की कोई कमी ना थी
पर होठों पे कोई बात जमी ना थी ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

चहरे पे चमक ,आखों में हया
और अधरों पर मुस्कान थी
उस लम्हे में बस गई
मेरी जान थी ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

एक कदम का भी फासला ना था ,,,,,,,,,,,,,,,,
पर ना जाने क्यों लगा की मीलों
की दूरी थी ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
उसे छूने की चाह दिल जगी
पर ना जाने क्या मजबूरी थी
सच बड़ी मीठी सी वो ख़ामोशी थी ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,


उमा चौधरी

2 comments:

Unknown said...

sundar rachna ...kafi dino baad blog post ki ...kaha thi ? intne dino anyways der aaye durust aaye.....


Jai Ho mangalmay HO

Anonymous said...

Thanx For Comment On My Blog....
Gud Luck