कोइ दीवानी कहता है, कोइ पागल समझता है,
के दुनिया की भरी महफिल में मुझे हर कोई दुश्मन सा लगता है,
मैं अपने दुख से बेजार हूॅ इतनी के हर फूल भी मुझको कांटा सा लगता हैं,
कोई दीवानी कहता है..................................................................................................
के मोहब्बत एक एहसासों की पावन सी कहानी है,
कभी कबीरा दिवाना था कभी मीरा दिवानी है,
यहां सब लोग कहते है मेरी आंखो में पानी है,
जो तू समझे तो मोती है जो ना समझे तो पानी है
कोई दीवानी कहता है..................................................................................................
अगर कोई लड़की किसी लडके पे मर बैठी तो हंगामा,
इजहारे मोहब्बत कर बैठी तो हंगामा,
अभी तक डूबकर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का,
मैं किस्से को हकीकत मे बदल बैठी तो हंगामा
कोई दीवानी कहता है..................................................................................................
उमा चौधरी
5 comments:
Aabhar is Navinikaran ke liye
sach kaha
kisse hon toh pyare lagte hain...par agar unhe je lo hum khud hi kisse ban jaate hain!!
Hi dear good woork tumne to kavita ka rukh hi badal diya try some thing orignal like this Anuj Dwivedi
kYA BAAT HAI
FIR LIKHNA START KAR DIYA
KHUSH RAHO
FEEL FREE TO CONTACT
kya khoob Uma....
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