Thursday, February 18, 2010

अधूरापन


बेबसी ,मजबूरी ना जाने कैसी है ये घुटन ,

तडपती ,बिलखती अकेली खड़ी ये विरहन ,

प्रेम के अनेको रंगीन स्वप्न देखने

के बाद क्यों है ये अधूरापन ?


ना नयनो में अश्रु है

ना अधरों पर मुस्कान ,

ना शब्दों में है रुदन

बस अपने ही प्रश्नों से

जाने क्यों विचलित है मेरा अन्तकरण ?


क्षोब है ह्रदय में ना जाने किस बात का ,

क्या ये चिन्ह है प्रेम अघात का ?

सच खु तो तुझसे इतना प्रेम करती हु मधुसुधन ,

के खुद ही करती हु अपने प्रश्नों का खंडन !


ना संगी , ना साथी और ना कोई सहेली

तेरी इस दुनिया में कान्हा में बिलकुल अकेली ,

क्या मुझे मिलेगा वो सुहावना जीवन ?

प्रेम के अनेको रंगीन स्वपन देखने के

बाद क्यों है आखिर ये अधूरापन


ऋतू वसंत भी कभी आई थी जीवन में

मैने भी कभी रास रचाए थे जीवन में

मात्र एक ही शब्द ने सब कुछ समाप्त किया क्षणभर में ,

और बदला मेरे जीवन का उपवन भयानक वन में

ना राधा ,ना रुक्मण और ना बन पाई ,

मै तेरी जोगन ...............................................

प्रेम के अनेको रंगीन स्वपन देखने के

बाद क्यों है आखिर ये अधूरापन ?????????????


उमा चौधरी

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