
नमस्कार दोस्तों
आज काफी दिनों बाद वक्त मिला आप लोगो से बात करने का पर चलिए मिला तो सही ना ,मैने कभी शेरो -शायरी नही की पर आज कुछ लिख तो सोचा की आप लोगो से ही पुछलू तो लिखने जा रही ही जसे भी लगे ,अपने विचार जरुर साझे कीजिएगा ।
" सागर से मिलने की तमन्ना इस नदिया की ,
शायद अधूरी ही रह जाएगी ,मै मेरे जमीर से
क्या लडू मेरी तन्हाई ही मुझे जिन्दा निगल जाएगी "
" मेरी जिन्दगी विरान है इसे विरान ही रहने दो ,
ना दे कोई इस में दस्तक ,
ये शमशान है इसे शमशान ही रहने दो "
" तू ने हमारा दिल तोड़ दिया ,
जा हम भी तुझ से मुह मोड़ लेगे ,
हमे डाल कर गुमनामियों के अंधेरे में
जा हम भी जुबा तेरा नाम लेना छोड़ देगे "
तो दोस्तों अब आप की बारी
उमा चौधरी
1 comment:
Bahut achha likha hai lakin.....kuch achha hone ke liye ek pal hi kafi hota hai....!! so thoda intzar kijie aapki kavita bh phir se gungunane lagegi...
Jai Ho Mangalmay ho
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