Friday, November 21, 2008

तू मेरे संग है


जबसे तुम्हे देखा,
तबसे जागी मन में ये उमंग है।
कुछ कर दिखाना है इस जहां को
क्योंकि तू मेरे संग है।

तुम्हे देख मिलती मुझे प्ररेणाा,
बढ़ता मेरा साहस और होता
मुझे ये आभास है, मैं जहां भी रहूं
तू मेरे साथ है।

तुम मेरे जीवन की नवप्ररेणा
अब तुम ही मेरा आदि और अंत हो
तुम्हारी बाते देती मुझे नवतरंग।
तुमसे ही आए जीवन में नवरंग है।
क्योंकि तू मेरे संग है।

प्रेम है तुझसे अथाह,
ये सत्य है नहीं कोई कथा
न समझना इसे मेरी कल्पना
क्योंकि तू मेरे जीवन का अभिन्न अंग है,
दूर हो जाएंगी अब जीवन से,
दुख की काली घटाएं,
क्योंकि तू मेरे संग है।

उमा चौधरी

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