एक दिन तुमसे मिलने आएगे जरूर
सवालों की गठड़ी लिये
पूछेगे तुमसे आपना गुनाह
आखिर क्या था मेरा क़सूर
दिन गुजरे ,साल गुजरे
बदल गए तेरी महफ़िलो के नूर
पर हम वही के वही रह गए
अपने सवालों और याद़ों की गठड़ी लिए
आपने यादों के शहर में ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
सब कुछ बदल कर रख लिया तुमने
ना पता मालूम है ना नंबर ,
जो दिया था तुमने कभी अब वो मिलता नही
हवा के रुख की तरह तुम बदल चुके हो
सफ़र पे हम भी निकल चुके है पर
सीने में एक नासूर लिए ,जो तेरी यादो का है
और कोंधता एक सवाल आखिर क्या था मेरा कसूर ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
उमा चौधरी
सवालों की गठड़ी लिये
पूछेगे तुमसे आपना गुनाह
आखिर क्या था मेरा क़सूर
दिन गुजरे ,साल गुजरे
बदल गए तेरी महफ़िलो के नूर
पर हम वही के वही रह गए
अपने सवालों और याद़ों की गठड़ी लिए
आपने यादों के शहर में ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
सब कुछ बदल कर रख लिया तुमने
ना पता मालूम है ना नंबर ,
जो दिया था तुमने कभी अब वो मिलता नही
हवा के रुख की तरह तुम बदल चुके हो
सफ़र पे हम भी निकल चुके है पर
सीने में एक नासूर लिए ,जो तेरी यादो का है
और कोंधता एक सवाल आखिर क्या था मेरा कसूर ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
उमा चौधरी
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