Friday, April 20, 2012

                  हाल-ए दिल

कभी बड़ा नजदीक तो कभी मीलो का फासला है
कभी मोहोब्बत की बातो का सिलसिला ,
तो कभी खामोशियो का पहरा  है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
कभी तेरा प्यार मेरी मंजिल और तेरा दिल
मेरा डेरा है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
तो दुसरे ही  लम्हे में ये अहसास हो
नही ये तो रैन बसेरा है
कभी वो खुशनुमा रात में
तेरे आगोश में मदहोश होती मेरी
सासों को सहेजा है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
तो कभी तेरी रुस्वइयो के इल्जामत का बंधा मेरे सर सहरा है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
अजीबो-गरीब है दस्ताने मोहोब्बत,.,,,,,,,,,,
कभी इस पे दुनिया का तो कभी वक़्त का पहरा है
ना समझे  वो नादा मेरे हाल-ए-दिल
उसके बिना ये जिंदगी खालिश एक मुश्हरा है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,



                                                                उमा चौधरी

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