Sunday, November 28, 2010

तुम से अलग हो के


तुम से अलग हो के बिखर सी गई है जिंदगी
किसी पुरानी किताब के पन्नो की तरहा
थोड़ी
पीली,थोड़ी काली और
फट सी गई है जिंदगी ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
तुम
से अलग हो के ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

गुलाब
थी कभी अब बबूल हो गई है
महकती खुशबु से अब धूल हो गई है जिंदगी
तुम से अलग हो के बिखर सी गई है जिंदगी

उमा चौधरी

Sunday, November 14, 2010

मुलाकात


आज फिर उनसे मुलाकात हुई ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
आखों ही आखों में बात हुई ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
कुछ लम्हे ही बिताये थे उनकी बाहों में
के उनके होठों से कल की बात हुई ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
फिर झलके आसू और जम के बरसात हुई ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
अधरों
पर फिर सवाल उठे
पर जवाब में सन्नाटे से मुलाकात हुई?????????????????????????????


उमा चौधरी