Tuesday, June 29, 2010

बचपन


बचपन का जमाना होता था ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
खुशियों का खजाना होता था ,
चाहत चाँद को पाने की ,
दिल तितली का दीवाना होता था,
खबर थी सुबह की ना शाम का ठिकाना होता था ,
थके हारे स्कूल से आते ,
पर
खेलने भी जाना होता था
दादी
की कहानी होती हती
परियो का फसाना होता था ,
कागज़
की कश्ती थी ,
हर
मोसम सुहाना होता था,
हर खेल में साथी होते थे ,
हर रिश्ता निभाना होता था,
पापा
की वो डांट गलती पर
मम्मी
का मनाना होता था ,
गम
की जुबान होती थी
ना
जख्मो का पैमाना होता था ,
रोने
की वजह ना होती थी
ना हसने का बहाना होता था ,
अब
नही रही वो जिंदगी ,
जैसा
बचपन का जमाना होता था
उमा चौधरी

1 comment:

vandana gupta said...

वाह वाह्……………सच कह दिया।
जाने कहाँ गये वो दिन????????


अब तो सिर्फ़ यही कह सकते हैं।
कोई लौटा दे मेरे बीते हुयेदिन