
इन्द्रधनुष के रंगों को अपने में समेटे हुए
ये जिंदगी खुशियों की बहार लाई ....................
मेरा बचपन उपवन की भाति हुआ तो
किशोरावस्था बदलो की ठंडी फुहार लाई ;;;;;;;;;;;;;;;;;
वो स्कूल की गलियों से होते हुए ................................
कोंलेज की लम्बी सडक आई ,,,,,,,,,,,,,,,,,,
फिर देखा हमने युनिवेर्सिटी का रास्ता और
अब यहाँ से भी हो रही है विदाई ;;;;;;;;;;;;;;;;
अब तो जिंदगी बीतेगी दिन गिन-गिन तुम बिन ,,,,,
सच याद बहुत आएगे ये दिन
वो रूठना वो मनाना ,वो चुरा कर खाना खाना
और फिर पत्थरों का टिफिन में ढेर लगाना
अपना ही क्लास में ग्रुप बनाना
छोटी छोटी प्लानिंग बनाना
दूसरों को सताना और खुद शरारत कर साफ़ बच जाना
वो रिदम की स्कूटी की शहर की गलियों में घुमाना
वो अप्पू से डांस स्टेप सीख कर फिर से भूल जाना
वो बरार की दिलदारी वो सुक्खी की यारी
दया दादी की डांट वो करारी
जब जब यादें याद आयेंगी
ये आँखें नम हो जायेंगी
यारों की दोस्ती किस्सों में बदल जायेगी
जिम्मेदारी के बोझ तले
ज़िन्दगी दब जायेगी
फिर एक ठहराव आएगा
फ्लैश बैक की तरह यादें
आँखों में घूम जायेंगी
आँखों से बहेंगे आंसू
याद अपनों की सताएगी ,
तब तक मेरी दया दादी सच में दादी बन जायेगी
श्रेयसी की तरह उछलने की कोशिश में
शायद कमर मुच जाएगी
याद याद याद बस याद ही रह जायेगी
उमा चौधरी
2 comments:
bahut khooob bidai ho to aisi....wahh wahhh
Jai Ho Muskurate raho ....khilkhilate raho....
hey aaj tumhari yaad aayi toh tumhara blog dekha!!
ye farewell ki pics mein tum sab kitne pyare lag rahe ho!! i really miss all of you ...wish you guys all the luck for all your future endeavours...
lots of love...
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