Tuesday, December 8, 2009

जिंदगी के पनों से


नमस्कार दोस्तों

आज काफी दिनों बाद वक्त मिला आप लोगो से बात करने का पर चलिए मिला तो सही ना ,मैने कभी शेरो -शायरी नही की पर आज कुछ लिख तो सोचा की आप लोगो से ही पुछलू तो लिखने जा रही ही जसे भी लगे ,अपने विचार जरुर साझे कीजिएगा

" सागर से मिलने की तमन्ना इस नदिया की ,

शायद अधूरी ही रह जाएगी ,मै मेरे जमीर से

क्या लडू मेरी तन्हाई ही मुझे जिन्दा निगल जाएगी "


" मेरी जिन्दगी विरान है इसे विरान ही रहने दो ,

ना दे कोई इस में दस्तक ,

ये शमशान है इसे शमशान ही रहने दो "


" तू ने हमारा दिल तोड़ दिया ,

जा हम भी तुझ से मुह मोड़ लेगे ,

हमे डाल कर गुमनामियों के अंधेरे में

जा हम भी जुबा तेरा नाम लेना छोड़ देगे "

तो दोस्तों अब आप की बारी

उमा चौधरी