Tuesday, September 15, 2009

ह्रदय तल से

आज ना जाने क्यो आखो में आसू है ,

और दिल में दर्द हो रहा है ,

जितनी तुम्हारे लिए खुशी है

उतना ही तुम से बिछड़ने का गम हो रहा है ...........................

तुमने बडी मासूमियत से कह तो दिया की

कविता लिख दो ,पर तुम्ही बताओ की

मुझ से आख़िर कविता लिखी कैसे जाए ,

जिसे तुम प्यार करते हो वो ही अगर

तुम्हे छोड़ कर जाए ,तो भला

कैसे शब्द सयोंजन हो पाए .....................

जीवन के सफ़र में जब हमने कुछ पग

चलना ही सिखा था ,तो तुम

हमे छोड़ कर जा रही हो

कैसा निष्ठुर ह्रदय है तुम्हारा ,

अपने बच्चो को रुला रही हो ..................................

अगर जाना ही था हमे छोड़ कर ,

अपना बनाया ही क्यो था तुमने

क्यो लड़ती थी तुम सब से हमारे लिए ,

क्यो अपने सपनों को छोड़ कर ,

हमारी आखो में सपना जगाया था तुमने ................................

दुनिया को बदलने की सीख देने वाली

आज ख़ुद ही हार मान रही है

तलवार थमा कर हमारे हाथो में

ख़ुद मैदान छोड़ रही है .......................................

शायद तुम जानती नही की तुम क्या हो ,

या तुम ने ख़ुद को कभी देखा ही नही ,

बारूद हो तुम ,जिस में एक आग है

जो सब कुछ बदल सकता है ,

तुम तो वो नदिया की धारा हो ,

जो विपरीत परिस्थतियों में भी अपने लिए रस्ता बनाती हो ........................

तुम्हे देख मिलती मुझे नव प्रेरणा ,और

एक अजीब सा तेज था तुम में

जो कहता था की कुछ तो अलग है ,

वो आकर्षण ,वो सौम्यता अब शायद कभी

देखने को ना मिलेगी हमे ,

नए चहरो और लोगो के बीच तुम ,

हमे भूल जाओगी ,अपनी खुशियों

में मशरूफ शायद ही तुम कभी हमे याद कर

पाओगी ...........................................

चलो आज हम भी तुम से ये वादा

करते है की सूरज की पहली

किरण जब तुम्हारा मुख

चूमेगी तो उसमे तुम मेरा प्यार पाओगी ...................................

आपकी लाडली ,

उमा चौधरी

5 comments:

ओम आर्य said...

ek khubsoorat abhiwyakti ....

डिम्पल मल्होत्रा said...

kisi apne ke bina jeena bahut mushkil hota hai.....achhi lagi aapki post...

Unknown said...

dost umma ji ....bahut achha likha aapne .....bas itna kahunga !! jindgi jeene ka naam hai to ji lo jee bhar ke.....kya khabar KAL HO NA HO .....or haa thodi shabdon main galtiya hai...sudhariye !! or ha aise hi sundar sundar likhte rahiye..

Jai HO Mangalmay HO

Padmini Jain said...
This comment has been removed by the author.
Padmini Jain said...

oops
thank you thank you thank you
well
i can't comment on the writing style or the word choice like others have done here
all i can see
is the emotion behind the omposition
and
the realisation to know ki it was written for me...
is ....is ... is
well
i am speechless

kya maine sach mein tum pe itna gehra asar chhora hai?
well
mein toh itni jhakaas nahi hun jitna tumne likha hai...par
sach mein
ban ne ki koshish zarur karungi
thank you bache