
शादी के दो साल बाद , ये
आभास होता है
के जीवन में प्यार से कही
ज्यादा विचारो का मिलना जरूरी होता है ********
नज़र आते हैं वो हमे,
दुश्मनों की तरह जिन से हमे
दुश्मनों की तरह जिन से हमे
बेइंतिहा प्यार होता है ,
नाश्ते के टेबल पर रोज़
सुबह झगडा होता है ,
जब आलू के पराठे की जगह
जला हुआ टोस्ट होता है -----------
प्रेमी और प्रेमिका में जब जीवन,
को लेकर विचारो में विरोधाभास होता है
"तब कोसते है दोनों उस पल को
जब एक -दूजे से मोहोबत का अहसास होता है "
प्रेमी चिल्लाते हुए कहता है
पागल हो गया था में ,
जो प्यार किया था तुम से
तो प्रेमिका जवाब देती है ,
"बडे जोश से इकरारे मोहोबत किया था तुम ने
अब होश आया जब निकाह किया तुम ने "
मै फिजा नही जो तुम्हे चाँद समझ कर
छोड़ जाउगी, सच कहती हु सारी उम्र
तुम्हारी छाती पर मूग दलती इसी घर
में मर जाउगी ----------------------
क्या सच में प्यार एक अहसास होता है
जो प्यार करने वालो के दिलो में
हमेशा जिन्दा होता है या
फिर एक किस्सा ,जो सोनी महिवाल ,
हीर राझे के प्यार की तरह कभी पुरा ही नही होता ,
क्यो कर लेते है प्यार में लोग शादिया ,जब उन
रिश्तों को निभाना ही नही होता ,
उस वक्त याद आती बडो की बाते
" के प्यार अँधा होता है
के प्यार अँधा होता है "
उमा चौधरी
नाश्ते के टेबल पर रोज़
सुबह झगडा होता है ,
जब आलू के पराठे की जगह
जला हुआ टोस्ट होता है -----------
प्रेमी और प्रेमिका में जब जीवन,
को लेकर विचारो में विरोधाभास होता है
"तब कोसते है दोनों उस पल को
जब एक -दूजे से मोहोबत का अहसास होता है "
प्रेमी चिल्लाते हुए कहता है
पागल हो गया था में ,
जो प्यार किया था तुम से
तो प्रेमिका जवाब देती है ,
"बडे जोश से इकरारे मोहोबत किया था तुम ने
अब होश आया जब निकाह किया तुम ने "
मै फिजा नही जो तुम्हे चाँद समझ कर
छोड़ जाउगी, सच कहती हु सारी उम्र
तुम्हारी छाती पर मूग दलती इसी घर
में मर जाउगी ----------------------
क्या सच में प्यार एक अहसास होता है
जो प्यार करने वालो के दिलो में
हमेशा जिन्दा होता है या
फिर एक किस्सा ,जो सोनी महिवाल ,
हीर राझे के प्यार की तरह कभी पुरा ही नही होता ,
क्यो कर लेते है प्यार में लोग शादिया ,जब उन
रिश्तों को निभाना ही नही होता ,
उस वक्त याद आती बडो की बाते
" के प्यार अँधा होता है
के प्यार अँधा होता है "
उमा चौधरी
4 comments:
उमा कविता में सब कुछ है यानि सारे तत्व पढ़ते हुए आनंद आया ख़ास तौर से आपकी समाज ने भी प्रभावित किया कि कहीं कोई पहलू छूट ना जाये.
"तब कोसते है दोनों उस पल को
जब एक -दूजे से मोहोबत का अहसास होता है "
क्या बात है ?
hummm bas bahut ho gya .....kon kahta hai pyar andha hota hai..ye to ahsas hai jo kisi na kisi bahane se aata hai or jindgi ke mayne hi badal deta hai..
pyar to wo ahsas hai jo....jo dil se hote hue aatma mai sama jata hai...
pyar koi galti nahi balki pyar wo khushnuma ahsas hai jo bas ho jata hai.....
sorry to say ...pyar andha nahi hota balki pyar ko kawel pyar dekhae deta hai...
you write nice poems.
ye poem kuchh kuchh suni hui si lagi Uma...
khud likhi hai ya kahin pasand aayi toh share ki hai?
tumhare kavita composition ke talent pe mujhe koi shuba nahi
improve karti raho ...all the best....
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