
वक्त के हाथों हमने धोखा खाया,
जिसे समझा था अपना उसे ही बेगाना पाया,
किसे दोष दे हम, हम नहीं जानते ,
बस अपनी किस्मत को कोस कर ही दिल को समझाया।
तमाशा बन कर रह गई मेरी जिन्दगी
मेरी मौत के बाद भी दुनिया को चैन ना आया,
सुर्खियों मे छाया रहा मेरा जनाजा ,
और लोगों ने उसे खबर बनाया,
कभी उंगुली उठाई घर पर तो कभी पिता को ही क़ातिल बताया ,
अब क्या उम्मीद करें हम इंसाफ की ,
हम ने तो खुद को मौत के बाद भी अंधेरो मे पाया ,
जब रू-ब-रू होंगे उस खुदा से तो बस यही पूछेंगे,
कि क्या सिर्फ इसी दिन के लिए तूने इंसान को बनाया।
छात्रा एमएजेएमसी प्रथम (उमा चौधरी)
छात्रा एमएजेएमसी प्रथम (उमा चौधरी)
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