अतिथि देवो भव÷ की परंपरा की दुहाई देने वाले देश में एक और विदेशी सैलानी से बलात्कारं। चंडीगढ के एक होटल के बाहर से अगवा की गई जर्मन युवती के साथ हुए इस हादसे से जहां इस सूची में एक और नाम जुडा हैं,वहीं सरकार में बैठे उन लोगो की परेशनी पर चिंता की लकींरे गहरी होना लाजिमीं है जो दुनिया के सामने भारत को सुरक्षित एवं बेहतर पर्यटन केंद्र के रूप में पेश करने और एक दशक के भीतर भारत में विदेशी सेलानियों की सख्या पांच गुणा करने की जुगत में है। पिछले दिंसबर में पर्यटन मंत्रालय की और से जारी एक्शन प्लान में कहा गया था कि भारत आने वाले विदेशी सैलानी का आंकडा वर्ष 2017 के खत्म होते तक 2 करोड़ 50 हजार तक ले जाना है, जो अभी तक50 लाख तक ही पहुंचा है। लेकिन साल के शुरू से लेकर अब तक विदेशी महिला पर्यटकों की हत्या,बलात्कार,व यौन उत्त्पीड़ना की आधादर्जन घटनाओं कें कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली किरकिरी इस मकसदकी राह में कितना बडारोछा बनेगी ,इसका अंदाजा लगा सकते हैं,कि अमेरिकी व ब्रिटया सरकारों ने जनवरी में अपने लागों से सॉ कहा थाकि वे भारत घुमने की योजना बना रहे है तो वहां अपनी सुरक्षा को लेकर सजग रहें। ऐसी चेतावनी किसी भी देया के लिए बदनुमा दाग से कम नहीं आकीं जा सकती है।इस चेतावनी और भारत आने वाले सैलानियों के साथ हुए हादसों पर विदेशी मीडिया ने खुलकर लिखा। सवाल यह है कि विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर अपनी नागरीक के साथ हुए इस हादसे पर और पहले भी जर्मन महिलाओं पर हुए यौन अपराधों के मघेनजर वहां की सरकार भीऐसी चेतावनी जारी कर दे तब क्या होगा ? भारत आने वाले सैलानीयों में बड़ा हिस्सा जर्मन लोगा का हैं। वर्ष 2006 कें आकड़ो के अनुसार ,संख्या की दृष्टि से अमेरिका,ब्रिटेन,कनाडा व फ्रांस के बाद जर्मन के सैलानीयों अका पांचवा स्थान हैं। वर्ष 2003 में सातवां और वर्ष 2004 और 2005 में यह स्थान छटा था।यानी भारत के विदेशी मुद्रा भण्डार तें जर्मन सैलानियों का योगदान बढ़ रहा है। मार्च 2006 में उडीसा के डीजीपी के बेटे द्वारा जर्मन की रिसर्च स्कॉलर के साथ अलवर में किए गए बलात्कार की घटना,मार्च 2005 में जोधपुर में एक ऑटोरिक्शा चालक व उसके साथी द्वारा 47 वर्षीय महिला से बलात्कार और इस साल मार्च में गोवा समुद्रतट पर जर्मन महिला के बलात्कार के प्रयासकी घटनाओं को भी विदेशी खासकर जर्मन सैलानी नहीं भुले होगे। ऐसे में क्या भारत सरकार को अपने ÷अतुल्य भारत ÷ अभियान का चेहरा बिगडने से बचाने और दुनिया के सामने ÷भारत ÷ को एक सुरक्षित देश के रूप में पेश करने के लिए कडे कदम नहीं उठाने चाहिए ? मेहमानों को ही अपना शिकार बनाने वाले अपराधियों का हौसला तोड़ने के लिए सख्त सजा देने का प्रावाधान एक शुरुवाती उपाय या कम से कम एक बडी बहस का विषय हो सकता है,लेकिन यहां भी सोचना होगा कि चंद लोगो के ऐसे कृत्य कहीं भारतीयों को विदेश जाने पर वहां लोगो की हिकारत भरी नजरों का निशाना बनने पर मजबूर न कर दें।
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