
कुछ जाने कुछ अनजाने हो तुम ,
कुछ आपने कुछ बेगाने हो तुम ,
कुछ सीधा कुछ नटखट सा अश्क है तुम्हारा ,
जो लगता है मन को प्यारा ,
बहुत दूर हो तुम बेशक मुझसे ,
पर सच कहू दिल के बहुत करीब हो तुम *****************
कभी रूठना कभी मानना ये तो है ,
बस तुम से मिलने का बहाना ,
बातो का ये सिलसिला यू चलता रहे ,
बस ये दुआ है रब से के तेरी मेरी दोस्ती का फूल हमेसा खिलता रहे ,
ख़ुद को खुशनसीब समझते है हम क्योकि ,
दिल के बहुत करीब हो तुम*******************************
एक अनदेखा सा अहसास है जो दिल के बहुत पास है ,
कुछ ना होते हुए भी बहुत खास है ,
या फ़िर यू कहू की एक अनकही पहेली है
दोस्त है या सहेली है या फ़िर वो ,
चलो जो भी हो तुम सच कहू ,
दिल के बहुत पास हो तुम ***********************
उमा चौधरी