
दुनिया में हर कोई ना जाने क्यो अनजाना सा लगता है
मुझे हर आपना भी बेगाना सा लगता है
मेरी किस्मत ने धोके खाए इतने ,
के हर फूल भी मुझे कांटा सा लगता है
ना मन में कोई उमंगें है , होठो पर तेरी रुसवाई ही है
देख तरी चाहत किस मोड़ पर ले आई है ,
कभी सोचा ना था ,के इस कदर बिछडे गे हम ,
प्यार में वादे करने वाले ना मिल सकेगे हम ,
चलो मान भी ले गर इसे खुदा का फ़रमान ,
पर तुझे कभी भूल पाएगे हम ,
उन लम्हों का खजाना भी मुझको ,अब फसाना सा लगता है
अब तो मेरा जीना भी मुझको अफसाना सा लगता है
उमा चौधरी
